एप्पल के सीईओ टिम कुक ने उदाहरणों से बताए बिजनेस के नैरेटिव को कंट्रोल करने का तरीका

 आप चाहे एक स्मॉल बिजनेस ओनर हों या किसी फॉर्च्यून 500 कंपनी के सीईओ, आप अपनी कंपनी के बारे में किसी भी अन्य व्यक्ति से बेहतर जानकारी रखते हैं। ऐसे में अच्छे कम्युनिकेटर्स जानते हैं कि अगर उन्हें सक्सेसफुल बनना है तो समय-समय पर अपने प्रॉडक्ट या विजन जैसी बातों से जुड़े सवालों के जवाब देने के लिए तैयार रहना पड़ेगा। इसके साथ ही एक प्रोफेशनल के तौर पर वेयह भी जानते हैं कि ये जवाब सीधे और समझ में आनेलायक होने चाहिए, बजाए गोलमोल व जटिल होने के। इस मामले में आपको एप्पल के सीईओ, टिम कुक से काफी कुछ सीखने को मिल सकता है। 


हर बार नया नजरिया रखें 
हाल ही में एप्पल की एक तिमाही रिपोर्ट में देखा गया कि कंपनी के प्रॉफिट्स व आईफोन के रेवेन्यू में गिरावट दर्ज की गई थी। इस बारे में पूछे गए एक सवाल के जवाब में टिम ने शुरुआत इस तरह की - जैसे कि मैं इसे देख पा रहा हूं - और बताया कि आईफोन्स का रेवेन्यू एक तिमाही के लिए काफी अच्छा था और फिर उन्होंने कॉन्वर्सेशन को कंपनी के सर्विसेज बिजनेस की ओर मोड़ दिया।


एक अन्य इंटरव्यू में कंपनी के गिरते बिजनेस के बारे में पूछे गए सवाल का जवाब टिम ने कुछ इस तरह दिया - अब मैं आपको अपना नजरिया बताता हूं - और फिर उन्होंने अपनी रेवेन्यूस्ट्रीम व वफादार ग्राहकों के बारे में बताया। नतीजा एक बार फिर ग्रो करते शेयर्स था। 


रीफ्रेम करें, गुमराह नहीं 
टिम अनेक बार इन्हीं प्रकार के शब्दों का सहारा लेकर नैरेटिव को कंट्रोल करते हैं। उनका लक्ष्य एक ही होता है - ऑडिएंस को अपनी बात साफ शब्दों में समझाना। किसी कॉन्वर्सेशन को रीफ्रेम करने का मतलब यह नहीं कि आप ऑडिएंस को गलत इंफॉर्मेशन से गुमराह करें।


यह रीफ्रेमिंग केवल अपने श्रोताओं की आपके बिजनेस के बारे में बेहतर समझ विकसित करने का एक तरीका है। आखिर गलत जानकारी देकर टिम कभी भी अपनी ऑडिएंस का भरोसा खोने का खतरा नहीं उठाना चाहेंगे।